Thu. Apr 18th, 2019

यही वजह है कि अंबेडकर जयंती को भारत में समानता दिवस और ज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है

 

गणेश मौर्य
अंबेडकरनगर: धूमधाम से मनाया गया बाबा साहब की जयंती, आज बाबा साहेब की जयंती के मौके पर जैतपुर थाना क्षेत्र गांव नाथूपुर लौधना के ग्राम प्रधान में प्रेम मौर्य ने बाबा साहब के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कहां की बाबा साहब को पूरा देश याद कर रहा है.
भारतीय संविधान के रचय‍िता, समाज सुधारक और महान नेता डॉक्‍टर भीमराव अंबेडकर की जयंती भारत ही नहीं बल्‍कि दुनिया भर में धूमधाम से मनाई जाती है. बाबा साहेब के नाम से मशहूर भारत रत्‍न अंबेडकर जीवन भर समानता के लिए संघर्ष करते रहे. यही वजह है कि अंबेडकर जयंती को भारत में समानता दिवस और ज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है.
अंबेडकर जयंती के मौके पर उनकी जीवनी पर प्रकाश डाला बाबा साहेब का जन्म जन्‍म 14 अप्रैल 1891 को मध्‍य प्रदेश के एक छोटे से गांव महू में हुआ था. हालांकि उनका परिवार मराठी था और मूल रूप से महाराष्‍ट्र के रत्‍नागिरी जिले के आंबडवे गांव से था. उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और मां भीमाबाई थीं. अंबेडकर महार जाति के थे. इस जाति के लोगों को समाज में अछूत माना जाता था और उनके साथ भेदभाव किया जाता था.
अंबेडकर बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि थे लेकिन जातीय छुआछूत की वजह से उन्‍हें प्रारंभ‍िक श‍िक्षा लेने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. स्‍कूल में उनका उपनाम उनके गांव के नाम के आधार पर आंबडवेकर ल‍िखवाया गया था. स्‍कूल के एक टीचर को भीमराव से बड़ा लगाव था और उन्‍होंने उनके उपनाम आंबडवेकर को सरल करते हुए उसे अंबेडकर कर दिया.
मुंबई की एल्‍फिंस्‍टन रोड पर स्थित गवर्नमेंट स्‍कूल के पहले अछूत छात्र बने. 1913 में अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए भीमराव का चयन किया गया, जहां से उन्‍होंने राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया. 1916 में उन्‍हें एक शोध के लिए पीएचडी से सम्‍मानित किया गया. उन्होंने बताया कि बाबा साहब ने जीवन में बड़े ही संघर्ष की आज उन्हें महान नायक के रूप में उनकी पूजा होती है।इस कार्यक्रम के मौके पर उपस्थित जसवंत राज नारायण गया प्रसाद प्रजापति चिरौंजी लाल राजेंद्र छोटेलाल और गांव की सभी सम्मानित लोग मौजूद रहे।

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