Thu. Apr 18th, 2019

जलियांवाला बाग नरसंहार: क्यों ना ऐसे जनरल डायर के वंशजों को सबक सिखाया जाए

 

वसीम अकरम त्यागी
जलियांवाला बाग नरसंहार को 100 साल हो चुके हैं। इस नरसंहार में अधिकारिक तौर पर 350 भारतीय मारे गए थे. ऐसा नहीं है कि यह नरसंहार अचानक हुआ, बल्कि यह पूरी प्लानिंग के तहत अंजाम दिया गया था तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे थे और इन प्रदर्शनों असहमति की आवाजों को कुचलने के लिए जनरल डायर ने यह क्रूरता पूर्वक कदम उठाया था।
9 अप्रैल 1919 को राम नवमी के दिन लोगों ने एक मार्च निकाला. राम नवमी के मौक़े पर निकले इस मार्च में हिंदू तो थे ही मुस्लिम भी शामिल हुए. मुस्लिमों ने तुर्की सैनिकों जैसे लिबास पहन रखे थे. बड़ी संख्या में लोग तो जमा हुए ही थे लेकिन जनरल डायर और उनके प्रशासन को सबसे अधिक चिंता हिंदू-मुस्लिम एकता देखकर हुई. आज इसी तरह की चिंता एक राजनीतिक पार्टी के नेताओं को होती है, और विडंबना देखिए इसी पार्टी का नेता अपने आप को सच्चा देशभक्त बताते हैं।
क्या ऐसे लोग देश भक्त हो सकते हैं जो लोग जनरल डायर की तरह हिंदू मुस्लिम एकता को देख कर डर जाते हों जिन्हें अपनी सत्ता खो देने का डर सताने लगता हो क्या ऐसे लोग देश भक्त हो सकते हैं? ऐसे लोग भी जनरल डायर से कम नहीं है इनका अपराध भी जनरल डायर के अपराध की तरह है उसने अपने सिपाहियों से निर्दोष भारतीयों की हत्या कराई थी और यह लोग अपनी सत्ता पाने के लिए देश में सांप्रदायिक दंगा भड़का कर निर्दोष लोगों की हत्या कराते हैं।
देश में अब चुनाव का माहौल है क्यों ना ऐसे जनरल डायर के वंशजों को सबक सिखाया जाए क्यों ना उन्हें सत्ता से बेदखल किया जाए। सोचिए! क्या ऐसे लोग जो देश में एक समाज को दूसरे समाज से लड़ाने की साजिशें रचते हो क्या किसी देश का भला कर सकते हैं?

loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *